800px-Jaunpurbridge जौनपुर ब्लोगर्स बनाने का निश्चय एक ऐसे समय मैं लिया गया जब की साझा ब्लॉग मैं झगड़ों को ले के पूरा ब्लॉगजगत चिंतित है. लेकिन यह ब्लॉग और साझा ब्लॉग से थोडा सा हट के है. यहाँ आने वाले हर एक मेम्बर से यह आशा की जाती हैं की वो इसको अपना ब्लॉग समझेगा और यहाँ अपने गाँव,घर ,वतन की यादें हम सब के साथ बाटेंगा. इसका यह मतलब हरगिज़ नहीं वो किसी और विषय पे नहीं लिख सकता   लेकिन इस ब्लॉग का सबसे बड़ा मकसद सभी मेम्बर को मालूम होना चाहिए. वतन से दूर वतन की यादें ज़रा कुछ अधिक ही आया करती हैं. परदेस मैं कहीं कोई  जब अपने देस का मिल जाता है तो कितनी ख़ुशी होती है यह मुझ जैसा एक परदेसी ही बता सकता है.  यही वतन की मुहब्बत मुझे जौनपुर ब्लोगर  तक खींच लाई.

महावीर शर्मा जी की कुछ पंकियां याद आ रही हैं की
जब वतन छोड़ा, सभी अपने पराए हो गए
आंधी कुछ ऐसी चली नक़्शे क़दम भी खो गए
खो गई वो सौंधि सौंधी देश की मिट्टी कहां ?
वो शबे-महताब दरिया के किनारे खो गए




वतन से दूर वतन की बातें करने और सुनने का मज़ा ही कुछ और हैं. मेरा सभी मेम्बेर्स से अनुरोध है की जो भी लिखें वो जौनपुर ब्लोगर के लिए ही लिखें. एक ही समय मैं कोई पोस्ट यहाँ भी और दूसरे ब्लॉग पे भी एक साथ ना डालें.
इस ब्लॉग मैं जिस किसी को भी आना है उसके लिए पयाम ए मुहब्बत और वतन की धरती से प्रेम आवश्यक है. यहाँ ना कोई पद है और  कोई बड़ा ना छोटा. सबके अधिकार बराबर के हैं और आशा करता हूँ की सभी इस को अपना ब्लॉग समझते हुए अपने लेख़ और कविताएँ पोस्ट करेंगे.
www.jaunpurcity.in

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